Header Ads

टिक टॉक को 50 अरब डॉलर में खरीदने के करीब माइक्रोसॉफ्ट; सत्या नडेला किंग मेंकर के रूप में उभरे, अब तक लिंक्डइन समेत कई डील कीं

शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिक टॉक के बिकने की चर्चा है। माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला इसकी डील के करीब हैं। ऐसी चर्चा है कि टिक टॉक की कीमत 50 अरब डॉलर है, लेकिन सत्या नडेला इससे सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि यह डील 50 अरब डॉलर से कम पर ही होने जैसी है। लिहाजा डील में अभी भी मोलभाव बाकी जरूर है, पर डील होना भी तय है। अगर यह हो जाती है तो पिछले दस सालों की यह सबसे बड़ी डील होगी। इस डील के जरिए माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला किंग मेकर बनेंगे।

सीईओ बनने के बाद से ही डील पर डील कर रहे हैं नडेला

2014 में सीईओ बनने के एक साल के भीतर ही उन्होंने स्वीडिश खेल कंपनी माइनक्राफ्ट खरीदी। बाद में उन्होंने प्रोफेशनल-नेटवर्क साइट लिंक्डइन कॉर्प की 24 बिलियन डॉलर की डील पक्की की। दरअसल अमेरिका में टिक टॉक को लेकर काफी दिक्कतें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पैदा कर दी हैं। ऐसे में टिक टॉक के सामने यही विकल्प है कि वह इस डील को लेकर आगे बढ़े। टिक टॉक को सबसे ज्यादा आबादी वाले दूसरे नंबर के देश भारत ने बैन कर दिया है।

विश्व में कुल 5-7 देशों ने इस तरह का कदम उठाया है। ये वे देश हैं जहां टिक टॉक का सबसे ज्यादा यूजर बेस है। इसलिए टिक टॉक के सामने दिक्कतें आ गई हैं।

डील होनी तय है

टिक टॉक की कीमतों को लेकर या डील को लेकर आगे क्या होगा यह तो समय बताएगा। इसकी पैरेंट कंपनी बाइट डांस के कुछ निवेशक हालांकि डील की उसी साइज को सही मान रहे हैं। वे मानते हैं कि 50 अरब डॉलर का वैल्यूएशन सही है। वैसे माइक्रोसॉफ्ट ने नडेला की लीडरशिप में कई डील की हैं और सब सफल रही हैं। इसलिए टिक टॉक की डील को लेकर कोई संदेह भी नहीं है। हो सकता है कि इसमें समय लगे, लेकिन बाजी नडेला के ही हाथ लगनेवाली है। पीसी ऑपरेटिंग सिस्टम से क्लाउड कंप्यूटिंग तक ले जाने वाले माइक्रोसॉफ्ट आर्किटेक्ट नडेला पहले से ही कुछ बड़े सौदों की देखरेख कर रहे हैं।

ट्रम्प प्रशासन ने बढ़ाई टिक टॉक की दिक्कतें

दरअसल जब से ट्रम्प ने सुझाव दिया कि वह टिक टॉक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकते हैं, तब से ही माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। हालांकि टिक टॉक को बाइटडांस से खरीद लेने या इसके अमेरिकी ऑपरेशन को कंट्रोल में लेने का विचार पेपर पर शुरुआत में काफी अच्छा दिख रहा था। लेकिन डेटा गोपनीयता और चीन के ओनरशिप स्ट्रक्चर ने अमेरिका की चिंताओं को दूर नहीं किया।

यदि टिक टॉक का ऑपरेशन एक विश्वसनीय, सार्वजनिक रूप से लिस्टेड अमेरिकी कंपनी के हाथों में आ जाता है तो यह डेटा पारदर्शिता के मुद्दे को हल कर सकता है।

डेटा सुरक्षा को लेकर माइक्रोसॉफ्ट पर भी होगा दबाव

माइक्रोसॉफ्ट भी ऐसी सोचती होगी कि वह किस तरह से यूजर्स के डाटा को सुरक्षित रखेगी। कंपनी ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि टिक टॉक के अमेरिकी यूजर्स के सभी निजी डेटा को सुरक्षित ट्रांसफर किया जाए और सेफ रखा जाए। वर्तमान में संग्रहित इस तरह के किसी भी डेटा को विदेशों में रखे सर्वर से हटा दिया जाएगा। डील से पहले माइक्रोसॉफ्ट को अमेरिकी प्रशासन को समझाने की जरूरत होगी। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट और विदेशी निवेश पर समिति को दिए अपने बयान में बाइटडांस का उल्लेख करने से पहले कंपनी ने संकेत दिया कि वह कौन से पहलू पर ज्यादा जोर दे रही है।

चीनी कंपनियों को लेकर निगेटिव माहौल है अमेरिका में

कुछ अमेरिकी कानून निर्माता पहले से ही बोर्ड में हैं। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्विटर पर लिखा कि जीत-जीत। उनके साथी रिपब्लिकन जॉन कॉर्निन और अन्य लोग भी सपोर्ट करते नजर आए। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल उन लोगों में से हैं, जिन्होंने पाया कि इस तरह के लेन-देन को चीनी कंपनियों द्वारा कपटी जासूसी और निगरानी पर नकेल कसने की जरूरत से हमें विचलित नहीं होना चाहिए।

वॉशिंगटन के सपोर्ट से नडेला के ऊपर है फाइनल करने का मामला

काफी संभावना है कि कुछ बैंकर्स और बाइट डांस कंपनी के इनसाइडर्स ने सूचना लीक की हो और इस दौरान कुछ और संभावित खरीदार आगे आएं और फिर एक प्राइस वार शुरू हो जाए। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट की जिस तरह की विश्वसनीयता और रणनीति है और वॉशिंगटन जिस तरह से सपोर्ट दे रहा है उससे देखकर तो यही लगता है कि अब बाइट डांस के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। अब इस डील की सारी जवाबदेही नडेला के ऊपर है कि वह इसे कितनी जल्दी करते हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि वह इसे 15 सितंबर तक सुलझा लेगा।

अब देखते हैं कि बिक्री के लिए क्या है

बाइटडांस का पिछले साल लाभ 3 अरब डॉलर था। रेवेन्यू 17 अरब डॉलर था। इस पूरी कंपनी में कम से 20 ऐप्स है-जिसमें दोईन (टिक टॉक का स्थानीय वर्जन) और समाचार फीड तूशियो शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले साल टिक टॉक का रेवेन्यू विश्व स्तर पर लगभग 300 मिलियन डॉलर था। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल टिक टॉक ने अमेरिका में बिक्री के जरिये 50 करोड़ डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा है। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, यह अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ऑपरेशंस खरीदने की तलाश में है।

सालाना रेवेन्यू 70 अरब डॉलर होने की उम्मीद

तीन छोटे बाजारों में थोड़ा और जोड़कर देखें तो इस साल शायद वार्षिक रेवेन्यू 70 करोड़ डॉलर हो सकता है। यह एक अरब डॉलर भी हो सकता है। भारत और ब्रिटेन का इसमें उल्लेख नहीं किया गया था। ये महत्वपूर्ण चूक है। यह देखते हुए कि ब्रिटेन भी एक प्रमुख सिक्योरिटी पार्टनर है और न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों से कहीं बड़ा है। जबकि भारत टिक टॉक का सबसे बड़ा संभावित बाजार है, लेकिन हाल ही में चीन के साथ सीमा संघर्ष के बाद यहां इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

तेजी से बढ़ रहा है टिक टॉक

फेसबुक इंक के शेयर ने 9.6 गुना बिक्री और ट्विटर इंक के शेयर ने 8.5 गुना बिक्री पर ट्रेड किया। निस्संदेह टिक टॉक और अधिक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्नैप इंक का भी यही हाल था। इस सोशल मीडिया ऐप ने 2017 में धूम मचा दी थी। स्नैप फिलहाल 16.5 गुना बिक्री पर ट्रेड कर रहा है और इसने अभी तक वार्षिक लाभ हासिल नहीं किया है। यूके, भारत या दर्जनों अन्य उभरते बाजारों में उपस्थिति बनाए बिना टिकटॉक को 50 अरब डॉलर में खरीदने का विचार हवा हवाई लगता है।

शेयर होल्डर्स का भी फायदा देखेंगे नडेला

बाइटडांस को सुनिश्चित होना चाहिए कि नडेला भी इसे जानते हैं। यह उनका हर हाल में फर्ज बनता है कि शेयर होल्डर्स के फायदे के लिए किसी भी डील को फाइनल करने से पहले जहां तक हो सके टिकटॉक को दबाकर उसे कम से कम कीमत पर खरीदें। इस सौदे को पूरा करने के लिए नियामकों को मनाकर और डील में आ रही बाधाओं को दूर करने के बाद, माइक्रोसॉफ्ट से उम्मीद की जा रही है कि वह डील में बड़ा डिस्काउंट हासिल करेगी। इस डील और डिस्काउंट की साइज नडेला के कद को साबित करेगी और इसे "डील ऑफ द डिकेड" के तौर पर याद किया जाएगा।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Microsoft to emerge as Satya Nadella King Menker, close to buying Tick Talk for $ 50 billion, has so far made deals including LinkedIn


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31a5uxO

No comments

Powered by Blogger.