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ट्रम्प खुद को श्वेत अमेरिकियों का मसीहा बता रहे, इससे अमेरिका में सामाजिक बंटवारे का खतरा

पहले जॉर्ज फ्लॉयड फिर जैकब ब्लेक। इन दो अश्वेतों के साथ पुलिसिया जुल्म का विरोध हुआ। अश्वेतों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभाव और जुल्म होता है। लोग सड़कों पर उतरे, हिंसा हुई और दंगे भी। लेकिन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नजरिया दूसरा है। वे कहते हैं- अमेरिका में कोई नस्लवाद या रंगभेद नहीं है। अगर कुछ है तो श्वेत अमेरिकियों को लेकर गलत धारणा।

जैकब ब्लेक का नाम तक नहीं लिया
हाल ही में ट्रम्प केनोशा गए। यहां जैकब ब्लेक के साथ पुलिसिया जुल्म हुआ। ब्लेक अपाहिज हो चुके हैं। हैरानी की बात है कि ट्रम्प ने जैकब का नाम तक नहीं लिया। उल्टा पुलिस की तारीफ की, जिसे पुलिस ने सात गोलियां मारीं। ट्रम्प कहते हैं- अश्वेतों का मामला उछालकर अमेरिका के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है। ये मानसिक बीमारी जैसा है। इसे हम जारी नहीं रख सकते। फिर भी अगर ऐसा (नस्लवाद या रंगभेद) का कोई मामला सामने आता है, तो शिकायत कीजिए। जल्द एक्शन लिया जाएगा। मैं लिबरल्स के लिए सिर्फ दुख जता सकता हूं। संविधान की धारा 101 खत्म कर दी गई है।

पहले कभी ऐसा नहीं हुआ
अमेरिकी राजनीति में ऐसे पहले कभी नहीं कि कोई राष्ट्रपति साफ तौर पर खुद को सिर्फ श्वेत यानी व्हाइट अमेरिकियों का उम्मीदवार बता रहा हो। पिछले महीने रिपब्लिकन पार्टी के कन्वेंशन में यह दिखाने की कोशिश की गई जैसे अश्वेत और हिस्पैनिक ट्रम्प लगे नस्लभेद के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। जबकि, यह ट्रम्प के एजेंडे में है। 2015 याद कीजिए। ट्रम्प ने कैम्पेन शुरू किया। मैक्सिको बॉर्डर क्रॉस करके आने वालों को रेपिस्ट्स करार दिया।

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने की थी। ट्रम्प ने शुरू में तो इसकी निंदा की। लेकिन, बाद में वे पुलिस के साथ खड़े हो गए। उस पर लगाम लगाने से बचने की कोशिश की। जबकि, इस घटना के खिलाफ पूरे देश में हिंसा और प्रदर्शन हो रहे थे। फ्लॉयड की मौत के बाद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ कैम्पेन चला। ट्रम्प ने इसे नफरत फैलाने वाली हरकत करार दिया। पुलिस को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।

फायदा भी हुआ
ये घटनाएं बताती हैं कि अपने बयानों और ट्वीट्स के जरिए ट्रम्प जो करना चाहते थे, उनमें कामयाब भी हुए। एक वर्ग है जो श्वेत अमेरिकियों को सबसे बेहतर मानता है। वो ट्रम्प के साथ हो गया। अश्वेतों के साथ हुई घटनाओं पर उन्होंने बहुत हल्का रवैया अपनाया। कहा- पुलिस ही क्यों। हर जगह कुछ गलत किस्म के लोग होते हैं। एक एक्सपर्ट शर्लिन आईफिल कहती हैं- ट्रम्प बेहद कट्टरपंथी हैं। इसके पहले कभी ये सब चीजें नहीं देखी गईं। लेकिन, यह खेल खतरनाक है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ट्रम्प का बचाव करती हैं। कैली मैकेनी ने कहा- राष्ट्रपति सबको बराबर मानते हैं। नस्लभेद का तो कोई सवाल ही नहीं है।

सर्वे कुछ और कहते हैं...
सीबीएस न्यूज ने पिछले हफ्ते एक पोल कराया। 66 फीसदी वोटर्स ने माना कि ट्रम्प श्वतों का समर्थन करते हैं। 50 फीसदी ने माना कि ट्रम्प ने अश्वेतों के खिलाफ काम किया। 81 फीसदी अश्वेत मानते हैं कि ट्रम्प ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। सर्वे में साफ तौर पर अश्वेत जो बाइडेन के साथ दिखे। इस बीच ट्रम्प के पूर्व वकील माइकल डी. कोहेन की किताब आई। उनके मुताबिक, 2016 में प्रचार के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अश्वेत उनका साथ नहीं देंगे।

ट्रम्प भी सियासत की नब्ज पहचानते हैं। अश्वेतों के बीच आधार मजबूत करने के लिए उन्होंने फुटबॉल स्टार हर्शेल वॉकर और पूर्व डेमोक्रेट सांसद वर्नेन जोन्स को अपने पक्ष में उतार दिया। ट्रम्प कहते हैं कि उन्होंने अश्वेतों के लिए किसी भी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति से ज्यादा काम किया है।

कितने सही हैं ट्रम्प पर आरोप
ट्रम्प ने पिछले हफ्ते फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नस्लवाद के आरोप खारिज कर दिए थे। डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के टकर कार्लसन मानते हैं- ट्रम्प के श्वेत अमेरिकियों का समर्थन हासिल है। लेकिन, सभी का नहीं। नस्लवाद की मुद्दा जटिल है। अमेरिकी सरकार के विभागों में इसे आप महसूस कर सकते हैं। अब अमेरिकी सरकार इसे दूर करने के लिए स्टाफर्स को ट्रेनिंग देने जा रही है। केंद्र या ट्रम्प सरकार में ऑफिस मैनेजमेंट एंड बजट के डायरेक्टर रसेल टी. वॉट कहते हैं- सरकारी विभागों में नस्लवाद या रंगभेद के आरोप सिर्फ झूठ और प्रोपेगंडा के अलावा कुछ नहीं हैं। इस मुद्दे को गलत इरादे से उछाला जा रहा है। फिर भी अगर कुछ है तो इसके दूर करने के लिए कदम उठाएंगे। अमेरिका के विकास में अश्वेतों का बड़ा योगदान है।

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फोटो पिछले हफ्ते की है। डोनाल्ड ट्रम्प केनोशा दंगा प्रभावित केनोशा गए थे। यहां एक अश्वेत जैकब ब्लेक को पुलिस ने सात गोलियां मारी थीं। वो अपाहिज हो गया है। हैरानी की बात यह है ट्रम्प ने यहां दंगाइयों और लूट की तो निंदा की, लेकिन जैकब पर एक शब्द नहीं बोले। इस घटना के बाद उन पर फिर आरोप लगे कि वे श्वेत अमेरिकियों का ही समर्थन करते हैं।


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