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नाइट पार्टियां बंद होने से केमिकल से बनी ड्रग्स का इस्तेमाल घटा, पौधे आधारित भांग और गांजा का इस्तेमाल बढ़ा

कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर लोगों की भावनाओं में बदलाव दिख रहा है। अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक किए गए सर्वे का रुझान बताता है कि केमिकल से बनी ड्रग्स का इस्तेमाल घटा है, वहीं पौधे आधारित भांग और गांजा का इस्तेमाल बढ़ा है।

सर्वे में लोगों ने खुलकर यह बात कबूली है कि कोरोना काल से पहले वे बार और रेस्तरां में पार्टियों के दौरान एक्सटेसी, कोकिन, हेरोइन जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल करते थे। चूंकि कोरोना काल में बार-रेस्तरां बंद हैं और लोग अकेले रहने पर मजबूर हैं, ऐसे में इन लोगों ने इन पश्चिमी ड्रग्स को छोड़कर भांग-गांजा का चुनाव किया है।

इसकी वजह यह बताई जा रही है कि भांग-गांजे के इस्तेमाल से मेंटल डिप्रेशन में राहत मिल रही है जबकि फैक्ट्रियों में बनी पश्चिमी ड्रग के इस्तेमाल से मेंटल डिप्रेशन उल्टे बढ़ रहा है। हाल ही में किए गए ग्लोबल ड्रग सर्वे में यह बात निकलकर आई है कि करोड़ों लोग घर के अंदर लॉकडाउन के कारण भयंकर तौर पर बोरियत का सामना कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया में 49% इस्तेमाल बढ़ा

इसी कारण से वे साइको एक्टिव ड्रग (भांग-गांजा) की तरफ आकर्षित हुए हैं। यह ऑनलाइन सर्वे 11 अमीर देशों के 55 हजार लोगों पर किया गया। सर्वे के मुताबिक हर पांच में से दो लोगों ने गांजा-भांग जैसे नशे का जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन किया। सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया में 49%, अमेरिका में 46% और ब्रिटेन में 44% इसका इस्तेमाल बढ़ा। 41% लोगों ने इसका कारण अकेलेपन की बोरियत बताया, जबकि 38% लोगों ने बताया कि वे डिप्रेशन के कारण नशा कर रहे हैं।

लॉकडाउन में नाइट पार्टियां और बार-रेस्तरां बंद होने के कारण कोकिन की खपत 38% कम हुई। एक्सटेसी 41% और केटामाइन का इस्तेमाल 34% कम हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होते ही जब नाइट पार्टियां फिर शुरू हो जाएंगी तो ड्रग्स का इस्तेमाल फिर बढ़ जाएगा। ज्यादा धूम्रपान और ड्रग्स की शेयरिंग कोरोनावायरस की जटिलताओं को और बढ़ा देगा।

कोरोनावायरस से जुड़ी अफवाह के कारण 800 से ज्यादा लोग मारे गए

कोरोनावायरस के बारे में गलत जानकारी से दुनियाभर में 800 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन के ताजा शोध में यह जानकारी सामने आई है। कोरोना से जुड़ी अफवाह के कारण लोगों को आंख की रोशनी से लेकर जान तक गंवानी पड़ी है।

ज्यादातर लोगों की मौत अत्यधिक गाढ़ी शराब पीने से हुई

रिसर्चर्स ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2020 के बीच आंकड़ों का अध्ययन कर पता लगाया कि ज्यादातर लोगों की मौत अत्यधिक गाढ़ी शराब पीने से हुई। शरीर को डिसइंफेक्ट करने के लिए पी गई मेथेनॉल के कारण 5,900 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और 60 लोगों की दृष्टि भी चली गई।



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कोरोना काल में बार-रेस्तरां बंद हैं और लोग अकेले रहने पर मजबूर हैं, ऐसे में इन लोगों ने पश्चिमी ड्रग्स को छोड़कर भांग-गांजा ले रहे हैं है। -फाइल फोटो


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