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अमेरिका में अपने प्रोडक्ट को धूल खाते देख आगबबूला हो गए थे सैमसंग चेयरमैन, सस्ते टच स्क्रीन से नोकिया को खत्म किया, 22 लाख करोड़ रुपए का साम्राज्य बनाया

दुनिया में सबसे ज्यादा स्मार्टफोन, टेलीविजन और मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के चेयरमैन ली कुन ही (78) का रविवार को निधन हो गया। 2014 में दिल का दौरा पड़ने के बाद से ही वे बिस्तर पर थे। 1938 में पिता द्वारा स्थापित की गई कंपनी को 30 साल के कार्यकाल में ली कुन ने एक वैश्विक ब्रांड के रूप में खड़ा कर दिया।

80 देशों में 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 62 सहयोगी कंपनियों के साथ 22.5 लाख करोड़ रुपए का साम्राज्य अब उनके बेटे जे वाय ली संभालेंगे, जो अभी कंपनी के वाइस चेयरमैन हैं। आज यह दुनिया की बेस्ट इंटरब्रांड कंपनियों की सूची में चार अमेरिकी कंपनियों एपल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के बाद पांचवे क्रम पर है।
सैमसंग के वैश्विक ब्रांड बनने की कहानी बड़ी रोचक है। ली कुन कंपनी को जीई, पीएंडजी और आईबीएम जैसा वर्ल्ड प्लेयर बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपनी टॉप लीडरशिप को 2000 तक की डेडलाइन दी थी। कंपनी की परफॉर्मेंस जांचने के लिए वे 1993 में वर्ल्ड टूर पर निकले थे।

फरवरी में कैलिफोर्निया के एक स्टोर में उन्होंने देखा कि सोनी और पैनासॉनिक के टीवी सेट फ्रंट विंडो में रखे थे और सैमसंग का टीवी पीछे नीचे के एक शेल्फ पर धूल खा रहा था। इससे वे आगबबूला हो गए। जून के अंत में जब वे जर्मनी पहुंचे, तो यहां दुनियाभर के एग्जीक्यूटिव्स की मीटिंग बुलाई। सबके सुझाव सुनने के बाद कुन ने 7 जून को स्पीच देनी शुरू की, जो तीन दिन चली।

लगातार बोलने के बाद वे शाम को ब्रेक लेते थे, ताकि एग्जीक्यूटिव्स सो सकें। उनके भाषण के आखिरी शब्द थे- ‘अपने बच्चों और पत्नी को छोड़कर सब कुछ बदल डालो। डिजाइन-तकनीक सब कुछ। मैं ऐसा इनोवेशन चाहता हूं जिसे दुनिया याद रखे।’ सैमसंग में इस स्पीच को ‘फ्रैंकफर्ट घोषणा पत्र’ के रूप में जाना गया।

इसके बाद सैमसंग के मोबाइल और टीवी की क्वालिटी में जबर्दस्त क्रांति आई और 1995 में कंपनी मार्केट के टॉप प्लेयरों में शामिल हो गई। तब एपल के बाद सबसे पहले टच स्क्रीन को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवाकर उसने नोकिया जैसी स्थापित कंपनी को मार्केट छोड़ने पर मजबूर कर दिया। 1995 में 24 हजार करोड़ रुपए का राजस्व था।

इसकी तुलना में आज कंपनी का राजस्व 100 गुना बढ़ गया है। कुन ने अपनी स्पीच को यादगार बनाने के लिए फ्रैंकफर्ट के उस हॉल के फर्नीचर और सजावटी सामग्री को खरीदकर कंपनी के हेडक्वार्टर के एक कमरे में वैसे ही रखवा दिया।

ताकि इसे देखकर आने वाली पीढ़ी सबक ले कि ‘इच्छाशक्ति’ से सब कुछ बदला जा सकता है। एपल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी को उसके आई फोन के लिए मेमोरी चिप और रेटीना डिस्प्ले सैमसंग ही करता है, जबकि दुनिया की तब पहली सबसे बड़ी इमारत ‘बुर्ज खलिफा’ भी सैमसंग ने ही बनाई है।

सैमसंग समूह जहाज निर्माण, जीवन बीमा, कंस्ट्रक्शन, होटल, मनोरंजन पार्क आदि क्षेत्रों में भी कार्यरत है। ली कुन-की अगुवाई में सैमसंग की मदद से ही द. कोरिया एशिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सका। उसकी जीडीपी द. कोरिया की कुल जीडीपी की तुलना में करीब 20% है।



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2014 में दिल का दौरा पड़ने के बाद से ही वे बिस्तर पर थे। 1938 में पिता द्वारा स्थापित की गई कंपनी को 30 साल के कार्यकाल में ली कुन ने एक वैश्विक ब्रांड के रूप में खड़ा कर दिया। (फाइल फोटो)


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