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कब तक होगी वोटिंग, क्या वास्तव में वोटिंग फ्रॉड हो रहा है; जानें ऐसे 16 सवालों के जवाब

अमेरिका में 3 नवंबर (भारतीय समयानुसार 4 नवंबर सुबह 6 बजे) को राष्ट्रपति चुनाव है। यहां अर्ली वोटिंग (यानी तय तारीख से पहले) सिस्टम भी है। इसका इस्तेमाल करते हुए लगभग 50% वोटिंग तो हो चुकी है। बाकी तीन दिन में बाकी वोटिंग भी हो जाएगी। वोटिंग डेडलाइन खत्म होते ही काउंटिंग भी शुरू होगी। अगर सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो 4 नवंबर शाम तक यह साफ हो जाएगा कि डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे या उनकी जगह डेमोक्रेट पार्टी के जो बाइडेन व्हाइट हाउस पहुंचेंगे।
यहां हम आपको वर्तमान में अमेरिकी चुनाव से जुड़े अहम सवाल और उनके जवाब दे रहे हैं।

Q. क्या अब भी लोग मतदान के लिए रजिस्टर कर सकते हैं?
A. यह राज्य की व्यवस्था पर निर्भर करता है। राज्यों में अलग-व्यवस्था है। राज्यों या इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट से जानकारी लें।

Q. क्या अब मेल इन बैलट (वोट) काउंट होगा?
A. अगर यह तय वक्त (वोटिंग क्लोज डेडलाइन) से पहले पहुंच गया तो इसकी गिनती जरूर होगी। यानी गिना जाएगा।

Q. क्या इलेक्शन डे यानी 3 नवंबर को पोलिंग स्टेशन पर जाकर वोटिंग करना सुरक्षित है?
A. महामारी का खतरा तो है। हेल्थ गाइडलाइन का पालन करें। मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करें। सैनेटाइजर यूज करें।

Q. क्या वोटिंग फ्रॉड यानी मतदान में धांधली वास्तव में हो सकती है?
A. अमेरिका में आमतौर पर ये संभव नहीं। अपवाद हो सकते हैं। इस साल न्यूजर्सी म्युनिसिपल इलेक्शन और 2018 में नॉर्थ कैरोलिना कांग्रेस इलेक्शन में कुछ शिकायतें जरूर मिली थीं।

Q. पोल वॉचर्स का क्या मतलब है?
A. कुछ राज्य मतदान के वक्त कुछ लोगों को इसे देखने की इजाजत देते हैं। अगर कुछ दिक्कत सामने आती है तो ये लोग इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को देते हैं। प्रशासन इन्हें हल करता हैं। इन लोगों को पोल वॉचर्स कहा जाता है।

Q. नेकेड बैलट क्या होता है।
A. पोस्टल बैलेट दो लिफाफों का एक पैक होता है। पहले लिफाफे के ऊपर इलेक्शन ऑफिस का पता और दूसरी जानकारी होती है। अंदर वाले यानी दूसरे लिफाफे में बैलट पेपर होता है। अगर ऊपरी लिफाफा खराब होता है तो इसे मिसिंग बैलट माना जाता है। यानी गिनती नहीं होती। ऐसा माना जाता है कि वोट सीक्रेसी खत्म हो गई है। यह व्यवस्था कुछ राज्यों में ही है।

Q. क्या 3 नवंबर (भारत में 4 नवंबर) को ही विनर का नाम कन्फर्म हो जाएगा?
A. पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसमें कई तकनीकि पेंच हैं। खासतौर पर राज्यों के अलग कानून और पोस्टल के साथ मेल इन बैलट की गिनती। पेन्सिलवेनिया और मिशिगन के अफसर कह चुके हैं कि काउंटिंग में उन्हें तीन दिन लग सकते हैं। लेकिन, यह जरूर है कि नतीजों का अंदाजा इलेक्शन डे यानी 3 नवंबर को लग जाएगा।

Q. अगर कोई कैंडिडेट नतीजे स्वीकार करने से इनकार कर दे तो?
A. 2016 में ट्रम्प जीते। तब भी उन्होंने कहा था कि मतदान में धांधली हुई। बहरहाल, अगर ऐसा कुछ होता तो मामला फिर मोटे तौर पर सुप्रीम कोर्ट ही जाएगा।

Q. सुप्रीम कोर्ट का क्या रोल हो सकता है?
A. अगर नतीजों पर सवाल उठें तो सुप्रीम कोर्ट का रोल जरूर हो सकता है। आपको याद होगा विपक्ष के विरोध के बावजूद ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट में नई जज एमी कोने बैरेट को अप्वॉइंट किया। वे पहले ही कह चुके हैं कि शायद इस बार नतीजों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। इसलिए 9 जजों का कोरम पहले ही पूरा कर दिया।

Q. ट्रम्प और बाइडेन में किसका पलड़ा फिलहाल भारी है?
A. नेशनल पोल्स के मुताबिक, बाइडेन की जीत की संभावना 50% जबकि ट्रम्प की 41% है। 9% वे वोटर हैं, जो कुछ नहीं कहना चाहते।

Q. क्या ये पोल 2016 की तरह गलत साबित हो सकते हैं?
A. इस बार राजनीतिक पंडितों ने मैथड में कई सुधार किए हैं। लेकिन, राजनीतिक विज्ञान का यह सूत्र बदल भी सकता है।

Q. क्या रूस के हैकर्स या वहां की सरकार चुनाव में दखलंदाजी कर सकती है?
A. लगता है कि वे इसकी कोशिश तो कर रहे हैं। राष्ट्रपति को छोड़ दें तो उनके अफसर तो इसकी आशंका जता रहे हैं। कुछ सबूत भी इस तरफ इशारा कर रहे हैं। लेकिन, साजिश कामयाब होगी....? इसमें संदेह है।

Q. क्या बाइडेन ने यह कहा है कि वे अगर जीते तो सिर्फ एक कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति रहेंगे?
A. नहीं। लेकिन, अगर वे जीते तो शपथ लेते वक्त 78 साल के हो चुके होंगे। उन्होंने ये जरूर कहा है कि वे पार्टी और आने वाली पीढ़ी के लिए सेतु यानी ब्रिज का काम करेंगे। इसके चाहे जो मायने निकाल सकते हैं।

Q. चुनाव से जुड़े कानूनी मुकदमों का क्या होगा?
A. कुछ खास नहीं। दरअसल, ये दोनों पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के तौर पर देखे जाने चाहिए। ये कई राज्यों में चल रहे हैं।

Q. क्या नतीजों में कुछ गड़बड़ हो सकती है? यानी ये साफ ही न हो पाए कि कौन जीता?
A. ये भी मुमकिन है। आप कह सकते हैं कि इसकी आशंका भी है।

Q. और आखिरी सवाल? आखिर हम कब जान पाएंगे कि कौन जीता?
A. फिलहाल, ये तय नहीं है। इसलिए इत्मीनान यानी धैर्य रखें।



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How long will voting be, is voting really fraudulent; Learn the answers to 16 such questions


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