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2016 में जिन्होंने वोट नहीं दिया था, वे इस बार बाइडेन के साथ, चार प्रमुख स्टेट में दिलाई बढ़त

अमेरिका के 4 सबसे अहम प्रेसिडेंशियल स्विंग स्टेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से आगे निकल गए हैं। न्यू यॉर्क टाइम्स और सिएना कॉलेज के सर्वे में सामने आया है कि बाइडेन को उन वोटर्स से ताकत मिली है, जिन्होंने 2016 के चुनाव में वोट नहीं दिए थे। अब वे बड़ी संख्या में डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में मतदान कर रहे हैं।

यही वजह है कि जो बाइडेन पेंसिलवेनिया, फ्लोरिडा, एरिजोना और काफी बड़े अंतर से विस्कॉन्सिन में बढ़त हासिल कर रहे हैं। इलेक्टोरल वोट के मामले में भी बाइडेन 2008 के मुकाबले काफी मजबूत हैं। तब वैश्विक मंदी के बावजूद उनके पार्टी के प्रत्याशी बराक ओबामा 365 वोट हासिल कर व्हाइट हाउस पहुंचे थे। प्रचार अभियान खत्म होने से पहले बाइडेन को फ्लोरिडा में मामूल बढ़त मिल गई है। यहां वह ट्रम्प से 3 पॉइंट आगे हैं।

एरिजोना और पेंसिलवेनिया में उनके पास 6 अंकों की बढ़त हैं। इनमें से किसी भी राज्य में ट्रम्प को 44% से ज्यादा समर्थन नहीं मिला। यूनाइटेड स्टेट्स इलेक्शन प्रोजेक्ट के अनुसार, चार में से तीन राज्यों के 9 करोड़ से ज्यादा वोटर अर्ली और मेल के जरिए वोट डाल चुके हैं। पेंसिलवेनिया के अलावा सर्वे में शामिल तीनों राज्यों के ज्यादातर लोगों ने कहा कि वे पहले ही वोट डाल चुके हैं।

पिछली बार आगे थे, वहीं पिछड़े ट्रम्प

इन राज्यों में 2016 के चुनाव में अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन से आगे रहने वाले राष्ट्रपति ट्रम्प इस बार पीछे चल रहे हैं। 3 नवंबर को होने वाले चुनाव से कुछ दिन पहले यह स्थिति बनना ट्रम्प के लिए गंभीर मसला है। पब्लिक पोल में वे मिशिगन में भी लगातार पीछे चल रहे हैं। मिशिगन उन बड़े राज्यों में से है, जहां पिछले चुनाव में ट्रम्प ने जीत हासिल की थी। हालांकि, ट्रम्प लगातार चुनाव प्रक्रिया पर शक जता रहे हैं। शनिवार को पेंसिलवेनिया में उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि चुनाव के बाद वोटों की गिनती में बहुत बुरी चीजें हो सकती हैं।

बाइडेन को ज्यादा समर्थन

पिछली बार वोट न देने वाले चारों राज्यों के वोटर्स का कहना है कि वे या तो वोट दे चुके हैं या ऐसा करने के बारे में सोच रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बाइडेन का सपोर्ट करते हैं। इनमें दोनों तरह के वोटर शामिल हैं। पहले वे जिन्होंने पिछले चुनाव में वोट नहीं दिया था और दूसरे वे जो तब वोट देने की योग्यता नहीं रखते थे।

47 साल की मेसिला डिबल भी इन वोटरों में शामिल हैं। उनका कहना है कि 2016 में उन्होंने वोट नहीं दिया था क्योंकि उन्हें लगा कि हिलेरी क्लिंटन देश के लिए सही राष्ट्रपति नहीं होंगी। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें ट्रम्प जैसा राष्ट्रपति मिला। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि इस बार उन्होंने बाइडेन को वोट देने का फैसला लिया है।



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यूनाइटेड स्टेट्स इलेक्शन प्रोजेक्ट के अनुसार, चार में से तीन राज्यों के 9 करोड़ से ज्यादा वोटर अर्ली या मेल के जरिए वोट डाल चुके हैं। -फाइल फोटो


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